तोड़ के सूरज का टुकड़ा, ओप में ले आऊं मैं! हो जलन हांथों में, तो क्या! कुछ अँधेरा कम तो हो. -मीत

ए ज़िन्दगी तू यूँ ना गुज़र अभी...











ए ज़िन्दगी तू यूँ ना गुज़र अभी...
तय करना है लंबा सफर अभी...
साया भी छोड़ जाता है, जब रात आती है,
रात ना कर, रहने दे सहर अभी...
चले जा रहे हैं हम, तन्हा ही मंजिल की तरफ,
धुंधला जाती है मंजिल, तू अँधेरा ना कर अभी...
ए ज़िन्दगी तू यूँ ना गुज़र अभी...
रोशन है तू तो, चले जाता हूँ मैं,
राह में कितनो से ही आगे निकल जाता हूँ मैं...
ठोकर खा जाऊंगा, गर दिखेगा नहीं कुछ,
रहम ना कर, पर कर ले फ़िक्र अभी...
ए ज़िन्दगी तू यूँ ना गुज़र अभी...
धड़कनों की धक-धक में,
हो रही है मौत की पदचाप...
पर सुनने नहीं देता है इसे,
तेरा ही तो स्वर अभी...
ए ज़िन्दगी तू यूँ ना गुज़र अभी...
तय करना है लंबा सफर अभी...

© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!
12 Responses
  1. seema gupta Says:

    "ye jindgee tu na yun gujar abhee'
    bhut dil se likhee gyee sunder abheevyktee, shayad hr inssan yhee chahtaa hoga, bhut kuch krna hotta hai jindgee mey magar sochen to jindgee yunhee gujar jatee hai, or kub aate hai kub chlee bhee jatee hai ptta hee nahee chulta hai na. bhut acche lgee"

    Regards


  2. kafi acha likha hai, abhivayakti achi ban padi hai.


  3. बहुत सुंदर.
    सचमुच जिंदगी को महसूस करो तो वो सबकुछ भुलाकर आगे ले ही जाती है.


  4. आपकी गजल का मुखडा बहुत ही दिलचस्प है, और उसपर फोटो ने तो कमाल कर दिया। बधाई।


  5. शोभा Says:

    बहुत सुंदर लिखा है


  6. मीत जी हमेशा की तरह बहुत अच्छा लिखा। पर मीत जी जिंदगी यूँ ही गुजर जाती हैं। और हम जिदंगी के थपेडो में ऐसे उलझ जाते है कि बस पता ही नही चलता कि जिदंगी कब गुजर गई।


  7. "रहम ना कर, पर कर ले फ़िक्र अभी...
    ए ज़िन्दगी तू यूँ ना गुज़र अभी..."
    .......कमाल का लिखा है, लिखते रहो।


  8. venus kesari Says:

    एक अच्छी कविता पढ़वाने के लिए धन्यवाद

    गजल की क्लास चल रही है आप भी शिरकत कीजिये www.subeerin.blogspot.com

    वीनस केसरी


  9. "SURE" Says:

    ए ज़िन्दगी तू यूँ ना गुज़र अभी...
    तय करना है लंबा सफर अभी...
    मीत जी अच्छी रचना पढ़वाने के लिए धन्यवाद,लिखते रहे बहुत अच्छा लगता है आपको पढ़ना


  10. मीत जी दिन पे दिन आपकी लेखनी निखरती ही जा रही है. अब क्या कहु इस रचना के बारे मे. अब तो कमाल ही कर दिया है आपने. बहुत ही सुन्दर रचना. और भी सुन्दर लिखते जाये. शुभकामनाये.


  11. jindgi se ru- b -u karati kawita. dhanwad


  12. *KHUSHI* Says:

    ए ज़िन्दगी तू यूँ ना गुज़र अभी...
    तय करना है लंबा सफर अभी...
    साया भी छोड़ जाता है, जब रात आती है,
    रात ना कर, रहने दे सहर अभी...
    चले जा रहे हैं हम, तन्हा ही मंजिल की तरफ,
    धुंधला जाती है मंजिल, तू अँधेरा ना कर अभी...
    ए ज़िन्दगी तू यूँ ना गुज़र अभी...

    Awesome post Meetji....


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