तोड़ के सूरज का टुकड़ा, ओप में ले आऊं मैं! हो जलन हांथों में, तो क्या! कुछ अँधेरा कम तो हो. -मीत

चौराहे पे, धरती माँ के गिर्द, एक नंगा बच्चा लेटा है...












तुम रेशम के आंचल में हो,
वो बिन ढांके ही लेटा है,
चौराहे पे, धरती माँ के गिर्द,
एक नंगा बच्चा सोता है...

मैं देख रहा हूँ, तुमको भी!
मैं देख रहा हूँ, उसको भी!
तुम स्वस्थ, सुसज्जित, सुंदर हो,
वो माटी पुता-पुता सा है...
चौराहे पे, धरती माँ के गिर्द,
एक नंगा बच्चा सोता है...

तुम खुशकिस्मत हो, मिली तुम्हें,
माँ की ममता की गर्मी है,
है तार-तार वो कपड़ा भी,
जिसे तन से उसने लपेटा है...
चौराहे पे, धरती माँ के गिर्द,
एक नंगा बच्चा सोता है...

जब रात आयेगी ठिठुरन की,
वो कस लेगा उस कपड़े को,
तुम किट-किट कर पा जाओगे,
अपनी माता के सीने को...
मिलती है माता की बाहें,
तुम्हें सिराहना बनाने को,
वो पत्थर के एक टुकड़े पे,
अपने सर को रख लेता है,
चौराहे पे, धरती माँ के गिर्द,
एक नंगा बच्चा सोता है...
तुम सुख से पलते-बढ़ते हो,
वो तड़प-तड़प दम देता है...
और लोग तब भी यही कहते हैं...
चौराहे पे, धरती माँ के गिर्द,
एक नंगा बच्चा लेटा है...


© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!
17 Responses
  1. जितनी सुंदर उतनी ही मार्मिक रचना, धन्यवाद. इब्ने इंशां के शब्द "यह बच्चा कैसा बच्चा है..." याद आ गए.


  2. भावुक करती रचना। बहुत ही अच्छा लिखा है आपने।

    तुम रेशम के आंचल में हो,
    वो बिन ढांके ही लेटा है,
    चौराहे पे, धरती माँ के गिर्द,
    एक नंगा बच्चा सोता है...

    बहुत ही मार्मिक।


  3. कुछ कहने के लिए नही है भाई......बस ये देखकर कभी कभी इश्वर पर संदेह होता है .....


  4. swati Says:

    तुम रेशम के आंचल में हो,
    वो बिन ढांके ही लेटा है,
    चौराहे पे, धरती माँ के गिर्द,
    एक नंगा बच्चा सोता है...
    निशब्द हूँ...आपने मोहित कर दिया .....


  5. hum tum Says:

    meet ji,bahut marmik rachna.bahut achche.aapki rachnaye ab jyada paini ho chuki hai.badhai.lage rahe.sabdkarm me.


  6. बहुत ही मार्मिक कविता हे,धन्यवाद


  7. bhut badhiya rachana. marmik.


  8. seema gupta Says:

    तुम सुख से पलते-बढ़ते हो,
    वो तड़प-तड़प दम देता है...
    और लोग तब भी यही कहते हैं...
    चौराहे पे, धरती माँ के गिर्द,
    एक नंगा बच्चा लेटा है...

    " AH! very emotionally composed, each word of the poetry is descrbing the pain related to the picture presendetd, touched me"
    Regards


  9. vaise is kavita ke upar waah waah to kya karun...ek aah si nikaal di aapne dil se...

    zindagi ko sarahne ka sabab bhi diya...kisi ke dard ko samajne ka nazariya bhi diya...


  10. ab kya kahu ise padhkar.. filhal to tippani nahi karunga,,


  11. vineeta Says:

    babut acchi aur man ko tar tar kar dene wali kavita. sundar....


  12. Bhai vaah..,
    Bahut marmsparshi kavita hai.
    Badhai


  13. सुंदर,..........
    मार्मिक,.......
    बेहतरीन,.......


  14. सच में बहुत ही सुन्दर रचना है
    शब्दों में शब्दमोती हैं।


  15. एक कटु सत्‍य को रेखांकित करती सुन्‍दर कविता, बधाई।


  16. parul Says:

    kitna such likha hai tumne
    is lekh ke liye abhar hei


  17. parul Says:

    itne sundar veechar khan se ate h


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