तोड़ के सूरज का टुकड़ा, ओप में ले आऊं मैं! हो जलन हांथों में, तो क्या! कुछ अँधेरा कम तो हो. -मीत

चलो एक ऐसा गीत लिखा जाए...











चलो एक ऐसा गीत लिखा जाए...
जिसे गाकर हर दिल में प्रेम उमड़ आए...
ना हो धर्म और जात के बंधन,
बस एक ही लहर में हर कोई बहता जाए...
चलो एक ऐसा गीत लिखा जाए...
माँ-बाप का अपने बेटों पे राज हो,
हो कुछ ऐसा के बेटी पे नाज़ हो,
बंजर ज़मीं पे पैदा हो हरियाली,
विधवाओं के मस्तक पर फ़िर से फैले लाली,
मन्दिर में हो अजान,
और मस्जिद में आरती गाई जाये...
चलो
एक ऐसा गीत लिखा जाए...

किसी के दामन में दाग ना हो,
किसी मासूम का जिगर चाक ना हो,
हर तरफ हो प्यार का उजाला,
नफरत की काली रात ना हो,
गरीब के फटे लिबास पे,
अमीर पैबंद लगाये...
चलो एक ऐसा गीत लिखा जाए...
जिसे गाकर हर दिल में प्रेम उमड़ आए...

© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!
19 Responses
  1. seema gupta Says:

    "chlo ek aisa geet likha jaye" or aapne sach mey in lines ko sarthek kertaa ek geet apnee nayab kalam se likh dala hai, bhut sunder bhav"

    Regards


  2. admin Says:

    काश ऐसा गीत हर कोई गाए और हमारा देश फिर से स्वर्ग बन जाए।


  3. L.Goswami Says:

    हम्म पर सवाल है गीत लिखेगा कौन ? हमे (जनता को ) तो रोजी रोटी की फिक्र में जान देने से वक्त मिले तो चैनल की टी. आर. पी बढ़नी है


  4. क्या खूब लिखा है।


  5. अपने बहुत ही अच्छा लिखा है ......सुंदर भाव हैं......मन को छु गये हैं


  6. बहुत ही सुंदर भाव.बहुत सुंदर रचना है आपकी .काश आपकी यह सोच सबकी सोच हो ओर यह सोच सच हो जाए...


  7. शोभा Says:

    बहुत अच्छा लिखा है. बधाई


  8. इसी गीत की तलाश थी...तो फ़िर देर किस बात की चलो गायें...
    नीरज


  9. Hitesh ji aapne apni rachana me bhut badi baat likh di. bhut sundar. likhte rhe.
    ek baat ke liye shama kijiye me fir se tipani dene me late ho gayi. kya karu jab mere aaspaas kuch aesa hota hai jo galat hai. me pareshan ho jati hu. is karan computer par bhi jada kaam nahi karti hu. or aajkal to kisi ko tipani bhi nahi kar rhi hu. par aapko kar hi deti hu. aage se time se tipani dene ka prayas karugi.


  10. नीरज जी के साथ हम भी कतार में है..........


  11. अजी हम भी नीरज जी ओर अनुराग जी के साथ हे...
    धन्यवाद


  12. बहुत उम्दा, क्या बात है!


  13. क्या कहूं मीत जी, कितनी सुन्दर रचना की हैं। कुछ चीजें जो रुह तक अहसास जगाती है। कुछ ऐसा ही किया है इस रचना ने।

    माँ-बाप का अपने बेटों पे राज हो,
    हो कुछ ऐसा के बेटी पे नाज़ हो,
    बंजर ज़मीं पे पैदा हो हरियाली,
    विधवाओं के मस्तक पर फ़िर से फैले लाली,
    मन्दिर में हो अजान,
    और मस्जिद में आरती गाई जाये...
    चलो एक ऐसा गीत लिखा जाए...

    मैं इसे गुनगुनाता हूँ।


  14. मीत जी अति सुंदर गीत लिख दिया गया है क्‍या आपको पता भी है इतना सुंदर बेहतरीन


  15. बहुत खूब मीत जी
    चलो एक ऐसा गीत लिखा जाए...
    जिसे गाकर हर दिल में प्रेम उमड़ आए...
    बढ़िया सुन्दर


  16. मीत तुम्हारा गीत बेहद उत्प्रेरक। काश ऐसे गीत हों हर जुबान पर और गाये हर दिल तो हम सही दिशा में आगे बढ़ें।


  17. गरीब के फटे लिबास पे,
    अमीर पैबंद लगाये...
    चलो एक ऐसा गीत लिखा जाए...
    जिसे गाकर हर दिल में प्रेम उमड़ आए.

    kitna khub likha hai aapne...


  18. Anonymous Says:

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