तोड़ के सूरज का टुकड़ा, ओप में ले आऊं मैं! हो जलन हांथों में, तो क्या! कुछ अँधेरा कम तो हो. -मीत

ना उड़ पायेगी ये महक तुम्हारी...













नहीं भूल सकता मैं, उन पलों को!
हिस्सा हैं मेरी जिंदगी का हर वो लम्हा,
जो साथ गुज़ारा है मैंने तुम्हारे...
धूल-धूल हो जायेगी किताब इस दिल की,
पर यादों के फूलों को ना मुरझाने दूंगा मैं!
ताजा रखूँगा मैं इनको...
साथ तुम्हारी खुशबु के,
साथ तुम्हारी महक के!
ना उड़ पायेगी ये महक तुम्हारी...
मेरा प्यार छीन लेगा इसके उड़ने की ताक़त,
तुम्हारी महक जम जायेगी मेरी सांसों में,
अपनी जिंदगी भी तो अब जम गयी है,
ना आगे ही जायेगी, ना पीछे ही आयेगी...
हाँ पर ये कदम अगर तुम्हारी जुदाई से रुक गए?
तो फिर ना चलेंगे!
चलेंगे भी कैसे, किसके लिए..?

© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!
9 Responses
  1. धूल-धूल हो जायेगी किताब इस दिल की,
    पर यादों के फूलों को ना मुरझाने दूंगा मैं!
    ताजा रखूँगा मैं इनको...
    kya baat hai. bhut hi sundar. photo bhi bhut badhiya hai. bhut rangeen lag rhi hai poem. ati uttam. teri yaado me bhi rang hai ab tak. aesi hi kavita lag rhi hai. likhate rhe.


  2. Meet ji, bhut khub. Rashmi ji thik kah rhi hai. vakai aapki kavita aesi hi lag rhi hai jaise teri yaado me bhi rang hai ab tak. jari rhe.


  3. बहुत धन्यवाद सुन्दर कविता के लिये.


  4. अति सुंदर लाजवाव मीत जी आपकी रचना वाकई इस कदर खूबसूरत है कि पढकर लगा जैसे कि किसी को बिछुडा हुआ मीत वर्षों बाद मिला ।


  5. मीत जी, आप की रचना पढ ते हुए ऐसा महसूस हुआ कि बहुत भीतर से निकली है यह आवाज जो रचना में ढल गई। बहुत सुन्दर रचना है।

    नहीं भूल सकता मैं, उन पलों को!
    हिस्सा हैं मेरी जिंदगी का हर वो लम्हा,
    जो साथ गुज़ारा है मैंने तुम्हारे...


  6. बहुत उम्दा..वाह!


  7. बहुत खूब ..बहुत सुंदर


  8. Bandmru Says:

    साथ तुम्हारी खुशबु के,
    साथ तुम्हारी महक के!
    ना उड़ पायेगी ये महक तुम्हारी...
    मेरा प्यार छीन लेगा इसके उड़ने की ताक़त,
    तुम्हारी महक जम जायेगी मेरी सांसों में,

    lahwab.... sukun ke aahsas ke saath.


  9. Rita Says:

    har rachna behad khoobsurat...behad lubhaavani...


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