तोड़ के सूरज का टुकड़ा, ओप में ले आऊं मैं! हो जलन हांथों में, तो क्या! कुछ अँधेरा कम तो हो. -मीत

साईं का संदेश...










मैं मिट्टी के कण-कण में हूँ,
मैं जीवन के क्षण-क्षण में हूँ!
झांके हैं नभ से तारे जो,
उन तारों की टिम-टिम में हूँ!
मैं ही तो हवाओं का वेग हूँ,
मैं ही तो घटाओं का मेघ हूँ!
अहसास करो तुम खुद में ही,
मैं तो हर इक के मन में हूँ!
क्यों फिरता है दर-दर पर तू?
मुझको पाने की चाहत में?
क्यों जलता है पल-पल में तू?
मैं तेरी हर हलचल में हूँ!
कर पलभर तो तू याद मुझे,
ना रहने दूंगा उदास तुझे!
आऊंगा जब पुकारोगे मुझे,
में जन-जन की सुमिरन में हूँ!
मैं मिट्टी के कण-कण में हूँ,
मैं जीवन के क्षण-क्षण में हूँ...



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3 Responses
  1. jai shaibaba. bhut badhiya.


  2. sir aap agar neo counter ki baat kar rhe hai to vha aasani se dal jata hai. aap us par kilik kariye usme likha hoga ki kaise dalaqna hai. par yha counter kuch samay bad money magta hai. yadi money n di jaye to sahi se kaam nahi karta hai.


  3. kmuskan Says:

    jaisainath
    में जन-जन की सुमिरन में हूँ!
    मैं मिट्टी के कण-कण में हूँ,
    मैं जीवन के क्षण-क्षण में हूँ..
    bahut badiya....


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