तोड़ के सूरज का टुकड़ा, ओप में ले आऊं मैं! हो जलन हांथों में, तो क्या! कुछ अँधेरा कम तो हो. -मीत

आ गगन पर पहुंचा हूँ मैं, घिसने को तारों के कोने..

आज बहुत दिनों बाद आना हुआ. ब्लॉग से कुछ दिनों के लिए नाता ही टूट गया था... पर फिर अचानक एक अंजान दोस्त की मेल आई और खींच लायी मुझे फिर यहीं... एक छोटी सी कल्पना या फिर सच जो भी है? आपकी नज़र है... उम्मीद है पसंद आये... तुम्हारा मीत
  टिमटिमा पाते नहीं ये,
धुंध इन पर चढ़ रही है,
दिखती नहीं, धरती से अब तो,
चमक इनकी लगी है खोने..
आ गगन पर पहुंचा हूँ मैं,
घिसने को तारों के कोने..
तपन सूरज की बढ़ रही है,
चाँद की ठंडक से अड़ रही है,
आग सी फैली है फिजा में,
कैसे कोई जायेगा सोने..
आ गगन पर पहुंचा हूँ मैं,
घिसने को तारों के कोने..
द्रोपदियां यूँ मर रही हैं,
दुश्शासनो से लड़ रही हैं,
क्यों नहीं आता कोई कृष्ण,
कंसों को फिर से मिटाने..?
आ गगन पर पहुंचा हूँ मैं,
घिसने को तारों के कोने..
      ----मीत---- 
 * फोटो punchstock.com के सोजन्य से.

© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!
12 Responses
  1. गज़ब के भाव्…………………।उम्दा प्रस्तुति।


  2. 'आ गगन पर पहुंचा हूँ मैं,
    घिसने को तारों के कोने.'

    ये पंक्तियाँ बेहद पसंद आयीं.

    -कविता में समय के बदलते रूप से नाराज़ तेवर भी दिखाई दे रहे हैं.
    बहुत अच्छी कविता है.
    ..आप के उस अनजान दोस्त का शुक्रिया..जिसने ब्लॉग पर लौटने और कविता लिखने को प्रेरित किया.


  3. बहुत खूबसूरत भावप्रवण रचना.

    रामराम.


  4. बहुत सुंदर गजल ... लेकिन यह तो तारो को नही.... €.... को पकडने की चाह लिये लगता है


  5. wow !!!!!!!!

    bahut khub


    shkehar kumawat


  6. वाह. कमाल की रचना. निहित अर्थ इतने खूबसूरत हैं, कि तारीफ़ के लिये शब्द ही नहीं जुटा पा रही.


  7. kshama Says:

    Kya gazab ki sashakt rachana hai yah! Wah!


  8. मीत Says:

    अब तो ठीक है न राज सर...
    उस समय ध्यान नहीं दे पाया था...
    शुक्रिया याद दिलाने का...
    ऐसे ही मेरी गलतियाँ बताते रहिये जिससे की मैं सुधर सकूँ...
    मीत


  9. Savita Rana Says:

    Wah ! Meet ji kya khub likha hai aapne, isko padh ker tu jaise pure din ki thakan dur ho gyi hai, bahut accha likhte hai aap.....


  10. वाह क्या बात है। बैशक काफी दिनों के बाद आए हो पर इतनी बेहतरीन रचना पढकर सारा शिकवा दूर हो गया। अरे भाई ऐसे सुन्दर सुन्दर ख्याल लिखते रहा करो।


  11. आ गगन पर पहुंचा हूँ मैं,
    घिसने को तारों के कोने..
    ye kamaal hai ...samporrn rachna prasanshniya ......bahut behatrin

    आ गगन पर पहुंचा हूँ मैं,
    घिसने को तारों के कोने..

    http://athaah.blogspot.com/


  12. मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! आप बहुत ही सुन्दर लिखते है ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है !


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