तोड़ के सूरज का टुकड़ा, ओप में ले आऊं मैं! हो जलन हांथों में, तो क्या! कुछ अँधेरा कम तो हो. -मीत

तेरी दुनिया के निराले, दस्तूर हैं...

पता  नहीं क्या लिखा है, बस दिल में आया ओर लिख दिया.. अगर कुछ उल्टा-पुल्टा हो कृपया बेझिझक बताइयेगा..जिससे की मैं सुधार सकूँ...
स्नेह
मीत 


 तेरी दुनिया के निराले,
दस्तूर हैं...
ग़मज़दा चेहरों पे ये कैसा,
नूर है...
खा रहा है गालियाँ, बदनाम हो रहा है,
लोग कहते हैं यही तो,
मशहूर है...
मुह सीये बैठे हैं, दिल में सबके
चोर है...
खिंच रहे हैं गर्त में, कोन सी ये,
डोर है...
फट रहे कानों के परदे,
किसके सीने का
शोर है...
तेरी दुनिया के निराले,
दस्तूर हैं...
क्यों नहीं पहुँचती है दुआ
खुदा तक...
आसमां धरती से क्या हो गया
दूर है...
उठे हुए हाथ भी अब थकन से
चूर हैं...
या खुदा मैं जान लूं, तू मीत  से भी
मजबूर है...
तेरी दुनिया के निराले,
दस्तूर हैं...

© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!
15 Responses
  1. Mired Mirage Says:

    वाह, बहुत बढ़िया !
    घुघूती बासूती


  2. बहुत अच्छी रचना कही आप ने धन्यवाद


  3. MUFLIS Says:

    क्यों नहीं पहुँचती है दुआ
    खुदा तक...
    आसमां धरती से क्या हो गया
    दूर है...

    mn ki kash.m.kash ko bayaaN karti huee achhee rachnaa...
    shaili aur bhaav dono saarthak lag rahe haiN .
    b a d h a a e e .


  4. हमें तो पसंद आई रचना



  5. तेरी दुनिया के निराले,
    दस्तूर हैं..


    -बिल्कुल सही!!


    बढ़िया रचना!!


  6. seema gupta Says:

    तेरी दुनिया के निराले,
    दस्तूर हैं...
    सच ही कहा एक सच्ची अभिव्यक्ति आभार
    regards


  7. सच कहते हो मीत भाई इस दुनिया के निराले द्स्तूर है। ना जाने कब ये द्स्तूर बदलेंगे। आप बैशक काफी दिनों में एक ही रचना लिखते है पर जब लिखते है तो वाकई शानदार और गजब का लिखते है।
    ग़मज़दा चेहरों पे ये कैसा,
    नूर है...
    खा रहा है गालियाँ, बदनाम हो रहा है,
    लोग कहते हैं यही तो,
    मशहूर है

    और जो सच्चे काम कर रहे है वो इस दुनिया की तंग गलियों में कहीं गुम रहते हए अपना काम कर रहे है।


  8. सच में निराले दस्तूर हैं। बहुत खूब लिखा है मीत जी।


  9. SACH MEIN DUNIYA KE DASTOOR NIRAALE HAIN .... AAPKI RACHNA LAJAWAAB HAI ...........


  10. Nice Post!! Nice Blog!!! Keep Blogging....
    Plz follow my blog!!!
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  11. dil me jo aaye aour use shbdo me uker diyaa jaaye to rachna ban jaati he, rachna ke liye achha yaa buraa kuchh nahi hota, vo sirf rachnaa hoti he,, lihaza meetji aapne sahi aour arth poorna rachna likhi he.
    मुह सीये बैठे हैं, दिल में सबके
    चोर है...
    खिंच रहे हैं गर्त में, कोन सी ये,
    डोर है...
    aaj ke dour ka drashya...behatreen


  12. यह कविता देर से पढ पा रही हूं... शायद इस की फ़ीड नही आयी है.
    ’क्यों नहीं पहुँचती है दुआ
    खुदा तक...
    आसमां धरती से क्या हो गया
    दूर है..”
    बहुत अच्छा लिखा है.
    अच्छे भाव हैं.लय भी है.शब्दों का सन्योजन भी अच्छा है.
    ऐसे ही लिखते रहीये.


  13. psingh Says:

    बहुत अच्छी एवं सुन्दर रचना
    बहुत -२ आभार


  14. Kalam Kranti Says:

    तेरी दुनिया के निराले,
    दस्तूर हैं...
    ग़मज़दा चेहरों पे ये कैसा,
    नूर है...
    खा रहा है गालियाँ, बदनाम हो रहा है,
    लोग कहते हैं यही तो,
    मशहूर है...

    Kya Khoob Kaha hai.


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