तोड़ के सूरज का टुकड़ा, ओप में ले आऊं मैं! हो जलन हांथों में, तो क्या! कुछ अँधेरा कम तो हो. -मीत

मैं हूँ नटखट अंश तुम्हारा...

भीगे कपड़ों से गिरती,
पानी की बूंदों में दिखता है अक्स तुम्हारा...
मन के हर कोने में,
रचा-बसा है वो स्नेहिल स्पर्श तुम्हारा...
माँ तुम तो धरती पे खुदा हो,
और मैं हूँ नटखट अंश तुम्हारा...
गिरा हूँ जब-जब मैं कहीं,
तुमने ही तो थामा,
बनकर चली हो हर लम्हा, हर घड़ी,
तुम्हीं तो मेरा आसमां...
जीत का सबब बनीं तुम,
में जिस क्षण भी हारा...
माँ तुम तो धरती पे खुदा हो,
और मैं हूँ नटखट अंश तुम्हारा...
जीवन के हर कदम पे,
संभाला है तुमने,
अपने आँचल तले,
मुझको पाला है तुमने,
जीवन भर देती रहना,
मुझको अपना सहारा...
माँ तुम तो धरती पे खुदा हो,
और मैं हूँ नटखट अंश तुम्हारा...
© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!
18 Responses
  1. शोभा Says:

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति है। सस्नेह


  2. बहुत ही सुन्दर प्यारा लिखा है आपने। माँ पर जितना भी लिखा जाऐगा वही कम होगा।

    माँ तुम तो धरती पे खुदा हो,और मैं हूँ नटखट अंश तुम्हारा....


  3. Meetji, bahut sundar rachna.Prabhavit kiya.


  4. माँ पर कुछ भी लिख दो वैसे ही खूबसूरत हो जाता है ओर आपने तो खूब लिखा है


  5. कया बात हे, बहुत ही सुन्दर कविता, मां पर, धन्यवाद


  6. बहुत सुंदर लिखा है आपने ...


  7. बहुत खूब। बहुत अच्छा।


  8. बहुत सुन्दर...बधाई.


  9. बहुत सुन्दर, मीत! बधाई!


  10. parul Says:

    meet ji apne bhaut acha likha h.app kaun se newspaper mein h.mein bhi reporter ho.


  11. parul Says:

    meet ji apne bhaut acha likha h.app kaun se newspaper mein h.mein bhi reporter ho.




  12. seema gupta Says:

    "each and every word has emotional touch, loved reading it"

    REgards



  13. swati Says:

    मुझे तो लगता है कि इसे शब्दों में बाँध ही नहीं सकते...आपने माँ के लिए लिखा बहुत अच्छा लगा


  14. मां तुम तो धरती हो, मैं हूं अंश तुम्हारा। बेहद खूब।


  15. kya baat hai hitesh ji. itani tipaniyo se to aap samjh hi gaye hoge ki aap ki rachana me kitana dum hai. mujhe bhut khushi hui ke aapko logo ne saraha hai. me to yahi kahugi or yahi kamana karugi ki aap isse bhi bhut bhut badhiya likhe. jari rhe.


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